आपने अर्थशास्त्र के बहुत सारे प्रश्न उत्तर पढ़े होंगे लेकिन यहा आपको जो मिलेगा वो सीधा board मोडल प्रश्न उत्तर मिलेगा .
अगर आप बिहार बोर्ड कक्षा 10 के तैयारी करते है तो ये लेख आपके के लिये बहुत मत्वपूर्ण है . इस लेख में मैंने आपको बताया है कक्षा 10 के सामाजिक विज्ञान (Social science)के अर्थशास्त्र(Economics) 6. वैश्वीकरण ke बारे में .
इस लेख में जो प्रश्न उत्तर है सभी प्रश्न Board Modal है . अगर आप यह सभी प्रश्न को अच्छी तरह से पढ़ लेते है .तो आपको Board Exam में अच्छा Marks जरुर मिलेगा .
6. वैश्वीकरण
1. वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विश्व के विभिन्न अर्थशास्त्रियों का एकीकरण किया जाता है, ताकि वस्तुओं एवं सेवाओं, प्रौद्योगिकी पूंजी और श्रम या मानवीय पूंजी का निर्धारण प्रवाह हो सके।
2. बहुराष्ट्रीय कंपनी किसको कहते हैं?
उत्तर- बहुराष्ट्रीय कंपनी हुआ है जो 1 से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण व स्वामित्व रखती है जैसे फोर्ड मोटर्स, सैमसंग, कोकाकोला, नोकिया, टाटा मोटर्स आदि ।
3. विश्व व्यापार संगठन क्या है? यह कब और क्यों स्थापित किया गया?
उत्तर- विश्व व्यापार संगठन(W.T.O) एक ऐसा संगठन है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर से प्रतिबंध हटाना था। इस संगठन की स्थापना जनवरी 1995 में की गई थी। इनका मुख्यालय जिनेवा में है।
4. निजीकरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- निजी करण का अभिप्राय निजी क्षेत्रों द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों पर पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से स्वामित्व प्रदान करना तथा उनका प्रबंध कराना है। आर्थिक सुधार के अंतर्गत भारत सरकार ने सन 1991 में निजीकरण की नीति अपनाएं।
5. वैश्वीकरण के कितने अंग होते हैं? संक्षेप में वर्णन करें?
उत्तर- वैश्वीकरण के चार मुख्य अंग है-
I) व्यवसाय अथवा व्यापार संबंधी अवरोधों की कमी:- व्यापार अवरोधको को कम करना ताकि वस्तुओं एवं सेवाओं का बेरोकटोक आदान-प्रदान हो सके। इसका अभिप्राय यह हुआ कि विदेशी कंपनियां बाजार में अपनी वस्तुएं तथा सेवाएं मुफ्त में बेच सकती सकती है।
II) पूंजी का निर्बाध प्रवाह:- ऐसा वातावरण कायम करना, जिससे विभिन्न देशों में पूंजी का प्रवाह स्वतंत्र रूप से हो सके। इसका अर्थ यह हुआ कि विदेशी पूंजीपति अब भारत में निवेश कर सकते हैं और भारतीय पूंजीवादी विदेशों में निवेश कर सकते हैं।
III) प्रौद्योगिकी का निर्बाध प्रवाह:- ऐसा वातावरण कायम करना कि प्रौद्योगिकी का निर्माण या बिना बाधा की प्रवाह हो सके। इसका मतलब है कि बिना किसी प्रतिबंध के किसी भी देश से प्रौद्योगिकी आयात कर सकते हैं।
IV) श्रम का निर्बाध प्रवाह:- ऐसा वातावरण कायम करना कि विभिन्न देशों में श्रम का निर्बाध प्रवाह हो सके, ऐसा देखने को मिल रहा है कि विकसित देश श्रम के निर्बाध प्रवाह में बाधाएं उत्पन्न कर रहे हैं।
6. भारत में समान व्यक्ति पर वैश्वीकरण का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर- पूंजी और उद्योग के क्षेत्र में विदेशी पूंजी के लगने से लोगों को अधिक रोजगार मिलने की संभावना व्यक्त की जाती रही है। मूल रूप से आम आदमी पर वैश्वीकरण का निम्नलिखित अच्छा प्रभाव पड़ा है-
I) उपयोग के आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता- वैश्वीकरण के कारण दुनिया के सभी देशों के उच्चतम उत्पादन लोगों को उपयोग के लिए उपलब्ध हो गया है। उदाहरण के लिए पहले जहां आम आदमी रेडियो से मनोरंजन प्राप्त करते थे, अब उनके लिए विभिन्न कंपनियां की रंगीन टेलीविजन जैसे चीजों की उपलब्धता हो गई है।
II) रोजगार की बढ़ी हुई संभावना:- वैश्वीकरण के कारण औद्योगिक प्रसार होने के कारण रोजगार के नए नए क्षेत्र खुल गए हैं। जिससे कुशल श्रमिकों के लिए अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध हो गए हैं।
III) आधुनिकतम तकनीक की उपलब्धता:- वैश्वीकरण के कारण विश्व के विकसित देशों के आधुनिकतम तकनीक अन्य विकासशील देशों में आसानी से उपलब्ध होने लगा है । जिससे आम लोगों के लिए आधुनिकतम तकनीक की उपयोग का दरवाजा खोल गया है.
7. वैश्वीकरण का बिहार पर पड़े प्रभाव को बताइए-
उत्तर- वैश्वीकरण के कारण बिहार का आर्थिक परिवेश में भी बदलता जा रहा है । बिहार में वैश्वीकरण के कुछ सकारात्मक तथा कुछ नकारात्मक प्रभाव पड़े हैं
*कुछ सकारात्मक प्रभाव निम्नलिखित है-
I) कृषि उत्पादन में वृद्धि:- हमारी खेती मॉनसून पर आधारित है, पर आज वैश्वीकरण का ही प्रभाव है कि कृषि उत्पादन के गिरावट की स्थिति में भी खाद्यान की भरपाई की जा सकती है।
II) निर्यात में वृद्धि:- वैश्वीकरण के कारण ही बिहार से कुछ प्रमुख वस्तुएं जैसे फल, आम,लीची तथा कुटीर और लघु उद्योग द्वारा उत्पादित वस्तुओं निर्यात हो पा रही है।
III) रोजगार के अवसरों में वृद्धि:- वैश्वीकरण का ही प्रभाव है कि बिहार में बहुत सारे सॉफ्टवेयर इंजीनियर आज विदेशों में नौकरी कर रहे हैं।
* कुछ नकारात्मक प्रभाव
I) कृषि एवं कृषि आधारित उद्योगों की उपेक्षा:- राज्य में कृषि पर किया गया निवेश संतोषजनक नहीं है, इन उद्योगों में वैश्वीकरण के पश्चात जितना निवेश होना चाहिए था उतना नहीं हुआ है।
II) कुटीर एवं लघु उद्योग पर विपरीत प्रभाव:- कुटीर एवं लघु उद्योग द्वारा उत्पादित वस्तुओं बहुराष्ट्रीय कंपनी द्वारा उत्पादित वस्तुओं से अच्छा और आकर्षक नहीं होती, ऐसी स्थिति में इन उद्योगों पर खतरा उत्पन्न हो जाता है।
III) रोजगार पर विपरीत प्रभाव:- बहुराष्ट्रीय कंपनी के कारण बहुत सारे औद्योगिक इकाइयां बंद होने से श्रमिकों का रोजगार खत्म हो गया.

0 टिप्पणियाँ