Biology (जीवविज्ञान) ex-1.जैव प्रक्रम class-10th bihar_board_Exam
Biology (जीवविज्ञान)
1.जैव प्रक्रम
1. रक्त क्या है? मनुष्य में श्वेत रक्त कणों की संख्या लिखें ।
उत्तर- रक्त एक प्रकार का तरल संयोजी उत्तक है । मनुष्य में श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या 5000 - 10000 प्रति घन मिली लीटर रक्त होती है।
2. रक्त क्या है ? मनुष्य में R. B. C की संख्या लिखिए।
उत्तर-रक्त एक प्रकार का तरल संयोजी उत्तक है । मानव रक्त मे R. B. की संख्या 45-50 लाख प्रति घन मिली ० रक्त होता है ।
3. उत्सर्जन क्या है ? इसके दो प्रमुख अंगों के नाम दे ।
उत्तर- शरीर में उपापचयी क्रियाओं द्वारा बने अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की क्रिया को उत्सर्जन कहते हैं।
उत्सर्जन अंग- वृक्क, फेफड़ा, त्वचा
4. मछली, मच्छर, केंचुआ और मनुष्य के मुख्य श्वसन अंगो के नाम लिखें-
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जीव का नाम |
श्वसन अंग |
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मछली |
गिलछिद्र |
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मच्छर |
वायु नलिका |
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केंचुआ |
त्वचा |
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मनुष्य |
फेफडा |
5. मनुष्य के आमाशय में HCl अम्ल स्रावित होता है वह कैसे कार्य करता है?
उत्तर- मनुष्य के अमाशय में HCl अम्ल स्रावित होता है। जो गैस्ट्रिक एंजाइम पेप्सिन क्यों सक्रिय करता है। यह सक्रिय होकर भोजन में पाए जाने वाले विभिन्न कीटाणुओं को मारता है।
6. पौधों में गैसों का आदान - प्रदान कैसे होता है?
उत्तर- पौधों में गैसों का आदान - प्रदान उनकी पत्तियों में उपस्थित रंध के द्वारा होता है । उनके CO2 एवं O2 का आदान-प्रदान विसरण क्रिया द्वारा होता है, जिसकी दिशा पौधे के आवश्यकताओं एवं पर्यावरणीय अवस्थाओं पर निर्भर करती है।
7. वाष्प उत्सर्जन क्रिया का पौधों के लिए क्या महत्व है?
उत्तर- पौधों में पत्तियों के छिद्रों से जलवाष्प के रूप में जल के बाहर निकलने की क्रिया वाष्प उत्सर्जन कहलाती है।
महत्व-i) यह जल अवशोषण को नियमित करता है।
ii) रसारोहण के प्रति उत्तरदाई होता है.
iii) पौधों में तापमान संतुलित रखता है।
8. श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में एक जलीय जीव की अपेक्षा स्थलीय जीव किस प्रकार लाभप्रद है?
उत्तर- जलीय जीव जल में घुली हुई ऑक्सीजन का श्वसन के लिए उपयोग करते हैं। जल में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा वायु में उपस्थित ऑक्सीजन की मात्रा की तुलना में बहुत कम है । इसलिए जलीय जीवो के श्वसन की दर स्थलीय जीवो की अपेक्षा अधिक तेज होती है। मछली अपने मुंह के द्वारा जल लेती है और बलपूर्वक इसे फेफडा तक पहुंचाती है, वहां जल में घुली हुई ऑक्सीजन को रुधिर प्राप्त कर लेती है।
9. कोई वस्तु सजीव है, इसका निर्धारण करने के लिए हम किस मापदंड का उपयोग करेंगे?
उत्तर- हम अपने चारों और अनेक वस्तुओं को देखते हैं। अब हमें इस बात की पुष्टि करनी है, कि कौन सी वस्तु जीवित है और कौन सी वस्तु अजीवित है। इसके लिए हम उनमे होने वाले गति को देखते हैं। यदि कोई वस्तु बिना बाह्य शक्ति लगाए एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाता है या गति करता है तो उसे हम जीवित कहते हैं।
10. प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री पौधा कहां से प्राप्त करता है?
उत्तर- पौधों में प्रकाश संश्लेषण क्रिया होती है जिसके लिए निम्नलिखित 4 वस्तुएं का आवश्यकता होती हैं,
I) कार्बन डाइऑक्साइड(CO2 ) :- पौधे इसे वायुमंडल से प्राप्त करते हैं।
II) जल:- पौधे इसे भूमि से जड़ों द्वारा प्राप्त करता है।
iii) पर्णहरित:- यह पौधे की कोशिकाओं से हरित लवक में उपस्थित होता है।
iV) सूर्य का प्रकाश:- पौधे इसे सूर्य के प्रकाश से फोटोन ऊर्जा कणों के रूप में प्राप्त करते हैं ।
11. पोषण क्या है? इनके विभिन्न चरण कौन-कौन से हैं?
उत्तर वह समस्त प्रक्रम जिसके द्वारा जीवधारी वाह्य वातावरण से भोजन ग्रहण करते हैं और भोज्य पदार्थ से ऊर्जा मुक्त करके शरीर की वृद्धि करते हैं, उसको पोषण कहते हैं।
जीवो में पोषण कि दो विधियों है-
I) स्वपोषी या स्वयंपोषी पोषण
II) परपोषी पोषण या विषमपोषी पोषण
12. आमाशय में पाचक रस की क्या भूमिका है?
उत्तर- पाचक एंजाइम्स पाचक रसों में उपस्थित होते हैं जो पाचक ग्रंथों से उत्पन्न होते हैं। यह पाचक एंजाइम भोजन के विभिन्न पोषक तत्वों को जटिल रूप से सरल रूप में परिवर्तन करके घुलनशील बनाते हैं।
13. हमारे आमाशय में अम्ल की भूमिका क्या है?
उत्तर- हमारे आमाशय में अम्ल की भूमिका निम्नलिखित है-
I) हमारे आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल जठर ग्रंथियों से स्रावित होता है और भोजन में अम्लीय माध्यम प्रस्तुत करता है जिससे जठर रस का पेप्सिन नामक एंजाइम अम्लीय माध्यम में कार्य कर सकें।
II) यह भोजन में उपस्थित रोगाणुओं को क्रियाशील एवं नष्ट करता है।
III) यह भोजन को शीघ्रता से नहीं पचने देता है।
14. भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है?
उत्तर- भोजन के पाचन में लार की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। लार एक रस है जो 3 जोड़ी लाल ग्रंथियों से मुंह में उत्पन्न होता है । लार में एमीलेस नामक एक एंजाइम होता है जो मंड जटिल अणु को लार के साथ पूरी तरह मिला देता है।
लार के प्रमुख कार्य:-
I) यह मुख के खोल को साफ करती है।
II) यह भोजन को चिकना एवं मुलायम बनाती है।
III) यहां भोजन को पचाने में भी मदद करती है।
IV) यह भोजन के स्वाद को बढ़ाती है।
15. प्रकाश संश्लेषण किसे कहते हैं ? इसका महत्व लिखिए।
उत्तर- प्रकाश संश्लेषण हरे पौधे सूर्य के प्रकाश द्वारा क्लोरोफिल नामक वर्णक की उपस्थिति में CO2 और जल के द्वारा कार्बोहाइड्रेट (भोज्य पदार्थ ) का निर्माण करते हैं और ऑक्सीजन गैस बाहर निकालते हैं , इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।
महत्व:-
I) इस प्रक्रिया के द्वारा पौधों का भोजन निर्माण होता है जिससे मनुष्य तथा अन्य जीव-जंतुओं का पोषण होता है।
II) इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन का निर्माण होता है, जो कि जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। जीव श्वसन द्वारा ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं जिससे भोजन का ऑक्सीकरण होकर शरीर के लिए ऊर्जा प्राप्त होती है।
16. पित्त क्या है? मनुष्य के पाचन में इसका क्या महत्व है।
उत्तर- पित्त रस प्रत्यक्ष रूप से भोजन के पाचन में भाग नहीं लेता है, लेकिन इसमें विभिन्न प्रकार के रसायन होते हैं जो पाचन क्रिया में सहायता करते हैं।
इस तरह पितरस निम्नलिखित महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है-
i) यह आमाशय से आए भोजन को अम्लीय प्रभावों को क्षारीय बनाता है।
ii) यह जीवाणुओं को मारता है तथा इसकी उपस्थिति में ही अग्नाशय रस कार्य करता है।
iii) यह आंत की दीवार को क्रमाकूचन के लिए उत्तेजित करता है।
iV)यह वसा में घुलनशील विटामिन को अवशोषण में सहायक होता है।
17. प्रायोगिक विवरण द्वारा बताइए कि प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में ऑक्सीजन गैस मुक्त होती है।
उत्तर- इसे सिद्ध करने के लिए एक बड़े विकर में जल लेकर उसमें हाइड्रिला के कुछ पौधे डालकर उसे कीप से ढक देते हैं।
इस कीप में सोडियम बाइकार्बोनेट की कुछ मात्रा डाल देते हैं जिससे हाइड्रिला के पौधे को प्रकाश संश्लेषण के लिए पर्याप्त मात्रा में CO2 मिलती रहे . अब कीप के ऊपर पानी से एक परखनली को उलट कर रख देते हैं।
अब इस पूरे उपकरण को सूर्य के प्रकाश में रखकर कुछ देर बाद देखते हैं कि हाइड्रिला के पौधे से बुलबुले उठकर परखनली के ऊपरी सिरे में एकत्रित होते हैं तथा परखनली के पानी का दल नीचे की ओर गिरने लगा है । परीक्षण के बाद पता चलता है कि यह गैस ऑक्सीजन है, जिससे सिद्ध होता है कि प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में ऑक्सीजन निकलती है।
18. जाइलम और फ्लोएम के बीच अंतर बतावे।
उत्तर-
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फ्लोयम |
जाइलम |
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1. ये वाहिकाएँ पतियों द्वारा बनाए गए भोजन को पौधों के विभिन्न भागों तक पहुंचाती है |
1. यह बंडल जल और खनिज लवणों को जरे से पौधों के सभी ऊपरी भागों तक पहुंचाते हैं। |
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2. यह जीवित उत्तक होते हैं. |
2. यह मृत उतक होते हैं, जीवित भी हो सकते हैं। |
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3. इसमें चालनी नलीकाय, साथी कोशिकाएं और फ्लोयम मृदुतक और फ्लोएम रेशे पाए जाते हैं। |
3. इसमें वाहिकाएं, वाहिनिकाये, जाइलम मृदुतक तथा काष्ठ रेशे पाए जाते हैं । |
19. रुधिर और लसीका में क्या अंतर है ?
उत्तर-
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रुधिर |
लसीका |
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1. यह लाल रंग का होता है। |
1. यह रंगहीन या हल्के पीले रंग का होता है। |
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2. इसमें हीमोग्लोबिन होता है। |
2. इसमें हीमोग्लोबिन नहीं होता है। |
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3. इस में लाल रक्त कणिकाएं, श्वेत रक्त कणिकाएं और रुधिर पत्रिकाएं होती है। |
3. इसमें कनिकाए नहीं होते हैं। |
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4. यह हृदय से अंगों तक बहता है और वापसी आता हैं । |
4. यह केवल एक ही दिशा में बहता है। |
20. श्वसन और श्वासोच्छावास में क्या अंतर है?
उत्तर-
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श्वसन |
श्वासोच्छावास |
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1. यह क्रिया कोशिका के भीतर होता है। |
यह क्रिया कोशिकाओं के बाहर होती है |
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2. इसमें एंजाइमों की आवश्यकता होती है। |
इसमें एंजाइमों की आवश्यकता नहीं होती है |
21. श्वसन और दहन में दो अंतर लिखें-
उत्तर-
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श्वसन |
दहन |
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1. शरीर के बाहर से ऑक्सीजन को ग्रहण करना तथा कोशिकीय आवश्यकताओं के अनुसार खाद्य श्रोत के विघटन में इसका उपयोग शोषण कहलाता है । |
जब कोई पदार्थ ऑक्सीजन में जलता है तो दहन कहा जाता है |
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2. इसमें ऊष्मा तथा प्रकाश की उत्पत्ति नहीं होती है |
इसमें उस्मा तथा प्रकाश की उत्पत्ति होती है |
22. स्वयंपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में अंतर लिखें-
उत्तर-
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स्वयंपोषी पोषण |
विषमपोषी पोषण |
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1. इस प्रकार का पोषण हरे पौधे में पाया जाता है। |
इस प्रकार का पोषण कीटो तथा जंतुओं में पाया जाता है |
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2. इस में कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल की परस्पर संयोजन क्रिया से कार्बन पदार्थों का निर्माण होता है। |
जंतु अपने भोजन के लिए पौधों पर तथा शाकाहारी प्राणियों पर निर्भर करते हैं |
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3. इन्हें अपने भोजन के निर्माण के लिए अकार्बनिक पदार्थों की आवश्यकता होती है। |
इसमें जंतुओं को अपने भोजन के लिए कार्बनिक पदार्थों की आवश्यकता होती है |
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4. भोजन के निर्माण की क्रियाविधि प्रकाश संश्लेषण में पर्णहरित तथा सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है |
इसमें भोजन का निर्माण नहीं होता है |


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